अपने घोंसले में


0

कितनी मासूम लग रही हो
ऐ छोटी सी, प्यारी सी, राजदुलारी सी चिड़िया
अपने घोंसले में हिफाजत से बैठी हुई तुम
पेड़ की टहनियों के बीच बने
तुम्हारे इस आशियाने को
सुंदर बनाने में
यह पेड़ तुम्हारी भरसक मदद कर रहा है तुम्हें उपहार में अपने फूल
जो हैं तुम्हारे परों से ही कोमल
भेंट कर रहा है
तुम्हारे चारों तरफ पत्तों को उगाकर
तुम्हें शीतल छांव दे रहा है
तुम्हारा जैसा है रूप
वैसा ही तुम्हें यह आकाश दर्पण
दिखा रहा है
तुम्हारे जैसे हैं रंग
वैसे ही यह मौसम अपनी छटा
चारों ओर बिखेर रहा है
तुम आसमान में उड़ सकती हो किंतु अपने पंख सिकोड़कर खामोशी से
बैठ गई हो पल दो पल सुस्ताने को
अपने बसेरे में
तुम बहुत समझदार हो
यह जानती हो सारी दुनिया घूम आओ लेकिन सुकून, ठहराव और चैन की सांस तो अपने घर आकर ही हर किसी को मिलती है।


Like it? Share with your friends!

0

0 Comments

Choose A Format
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals