अपने ख्यालों की सवारी पर होकर सवार


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कल्पना की उड़ान से
कोई पंख फैलाकर
उड़ सकता आसमान में
बादल के टुकड़े पर बैठ
सैर कर सकता
एक अनोखे जहां की
कायनात के रंगों को भरकर
अपनी झोली में
फूलों की एक सुगंधित बगिया
निर्मित कर सकता
अपने मन की
कभी चांद को तलाश सकता तो
कभी सूरज को पुकार सकता
अपनी ही आवाज की गूंज में
खोकर
अपने संसार की खुशियों को
पा सकता
अपनी हदों को खोल सकता
एक विस्तृत आकाश पा सकता
आसमान की ऊंचाई तक ही नहीं
उसके पार या फिर
उसके पार
वह जहां तक चाहे
वहां तक
अपने ख्यालों की सवारी पर होकर सवार
जा सकता।


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