लाइक और कमेंट की दुनिया
सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं है
वास्तविक जीवन पर भी इसका दूरगामी प्रभाव
दिखाई पड़ता है
किसी की पोस्ट को सोशल मीडिया पर
या तो लाइक करें या उस पर कोई कमेंट करें
डिसलाइक का कोई विकल्प नहीं होता
लाइक नहीं करते तो इसका मतलब या तो पोस्ट को
देखा नहीं
देखा है तो उस पर कोई विचार बना नहीं
कितना बुरा लगेगा किसी को गर
कमेंट किसी का नकारात्मक हुआ
कोई भद्दी टिप्पणी करता या
मजाक उड़ाता हुआ
कमेंट सकारात्मक ही होना चाहिए
किसी को प्रेरित करता
किसी में सुधार लाने की कोशिश करता
हुआ
किसी की झूठी तारीफ करना भी उचित नहीं
लेकिन किसी से ईर्ष्या पालते हुए
उसे नीचा दिखाना खुद का समय ही
नष्ट करने के समान है
आजकल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में
किसी को इतनी फुर्सत नहीं कि
वह एक लंबी चौड़ी वार्तालाप करे
ऐसे में अपनी व्यक्तिगत राय
जाहिर करने का यह एक उचित तरीका है
जो समय की भी बचत करता है यानी
'लाइक और कमेंट'
वास्तविक जीवन में भी हर कोई अपनी तारीफ
सुनना ही पसंद करता है
वह भी संक्षेप में और सही मुद्दे पर
कमेंट कोई करे तो किसी की पसंद का और
उच्च स्तर का अन्यथा
खामोश रहना एक बेहतर विकल्प है
इजहार की जरूरत ही नहीं अगर
शब्दों का प्रयोग सही प्रकार से करना न
जानता हो कोई
लंबे चौड़े वाक्य न बोलकर
शॉर्ट में बोलना सीख लेना चाहिए
आजकल के दौर में हर किसी को
लाइक करें ज्यादा से ज्यादा
डिसलाइक तो कभी किसी को
करें ही नहीं
कमेंट करें तो ऐसा कि सामने वाला
अच्छा महसूस करे
यह सब जीने की एक कला के तौर
तरीके हैं जिन्हें जल्द से जल्द हर
किसी को सीख लेना चाहिए और
अपनी दिनचर्या को सुंदर और
सुचारू रूप से चलाने के लिए इसका
प्रयोग भी बखूबी करना चाहिए।
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