सूरज तुम जा रहे हो
कुछ पलों का साथ
तुम्हारे साथ
रह गया है शेष
कल सुबह जब तुम उगोगे तो
फिर मुलाकात होगी
जब तक रहेगी जिंदगी
तुमसे सुबह से शाम तक
रोज ही गुफ्तगू होगी
तुम हो मेरे दोस्त पक्के
तुम्हारे रंग बहुत ही ज्यादा हैं
चमकीले
नहीं कहीं से कच्चे
तुम जो सांझ को ढल जाते हो
मुझे इंतजार रहता है तुम्हारा
अगली सुबह तक
काश! अपनी यह मुलाकातों का सिलसिला ऐसे ही बरकरार रहे
एक लंबे समय तक बाकी
खुदा की मर्जी।
0 Comments