जो कल बीता
वह लगता नहीं कि
मेरे साथ बीता ही
कोई पल था
जिंदगी की रफ्तार
आगे जो बढ़ती है
पीछे भी पलट सकती होती,
किसी भी दिशा में
जब चाहे
मुड़ सकती होती तो
कितना अच्छा होता
हर चीज को छोड़ो
अपनी जिंदगी पर ही
हो सकता अपना नियंत्रण तो
कितना अच्छा होता।
जो कल बीता
वह लगता नहीं कि
मेरे साथ बीता ही
कोई पल था
जिंदगी की रफ्तार
आगे जो बढ़ती है
पीछे भी पलट सकती होती,
किसी भी दिशा में
जब चाहे
मुड़ सकती होती तो
कितना अच्छा होता
हर चीज को छोड़ो
अपनी जिंदगी पर ही
हो सकता अपना नियंत्रण तो
कितना अच्छा होता।
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