अपनी जन्नत के द्वार पर


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मैं आसमान की एक परी हूं

वहां बसा जन्नत का जहां मेरा आशियाना

मैं इस जमीन की नहीं

न जाने कैसे जाने अंजाने

बन गया है यह कुछ समय के लिए

मेरे रहने का एक ठिकाना

यहां सब कुछ है

एक प्यार के सिवाय

जन्नत एक ऐसी जगह है

जहां जो कुछ भी मौजूद है

उसमें मोहब्बत कतरा कतरा समाये

प्यार के बिना जीवन नीरस हो

जाता है

दिल में प्यार का अहसास जो न हो

मौजूद तो वह एक खंडहर हो जाता है

मैं तो प्रेम की प्यासी हूं

यह खाली घर

बिना प्यार का

मुझे अब रास नहीं आता

कुछ समय और गुजार लूं

कुछ अनुभव और बटोर लूं

कुछ पल और इस दुनिया के रंग

देख लूं फिर

प्रस्थान करते हैं

अपने नगर

अपनी डगर पर चलते हुए

पहुंचते हैं

अपने घर

अपनी खुशियों से भरी एक

मंजिल पर

अपनी जन्नत के द्वार पर

और उसे जोरो से आवाज लगाकर

कहते हैं कि

खोल दो दरवाजा मेरे स्वागत के

लिए कि

न जाने कितनी सदियों से बिछड़ी

यह प्रेम दीवानी आई है

अपने बिछड़ों से मिलने

अपने गुजरे जमाने में

एक बार फिर वापिस

अपने पुराने महल में

अपने सामान के बीच

अपने पुराने समय में लौट आई है

एक जन्नत के सुकून भरे

अहसास के साथ

एक नये सिरे से जीने के लिए।


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