अपना जीवन अर्पित करते हुए


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कहने को

वह सड़क अकेली

दिखाई पड़ रही थी क्योंकि

कोई दूर-दूर तक उस सड़क पर चलता हुआ नहीं दिख रहा था

चलो अच्छा है कि

कुछ देर के लिए सही

उस पर पड़ा हुआ लोगों का बोझ कुछ समय के लिए कम हुआ

उसे कुछ आराम मिला

कुछ वक्त खुद के लिए मिला

नहीं तो

उसने भी किसी व्यक्ति की तरह ही

अपनी सारी उम्र गुजार दी

दूसरों को ही खुश करते रहने में

उनका सफर तय कराते रहने में

उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचाने

के लिए उनकी हर घड़ी मदद

करने में

उसने पर क्या कभी यह

सोचा पल भर के लिए भी कि

उसकी मंजिल कौन सी है

उसे क्या प्राप्त करना है

वह जी रही है या

मर रही है या

किसी दिन एक झटके में

दूसरों को ही अपना जीवन

अर्पित करते हुए

उसका दम तो नहीं निकल

जायेगा।


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