अनजाने रास्ते


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यह जिंदगी के रास्ते

मेरे लिए अनजान

मैं खुद के लिए अनजान

मेरे घर के दरो दीवार से मैं

अनजान

दर्पण में खुद को देखकर

ऐसा महसूस होता है कि

बन जाऊं खुद से अनजान और

खुद को ही न पहचानूं

जिंदगी को जब तक न जाना था

तब तक लगती थी जानी पहचानी सी

जब से इसे करीब से जाना है

मैं तो खुद से हुई अनजानी सी

कोई कदम उठाती हूं

आगे बढ़ने के लिए लेकिन

तभी की तभी

पीछे लौट आती हूं

भटक गई जो अनजान

रास्तों पर तो

अपने घर तक लौटकर कैसे

आऊंगी

यह शहर

यह रास्ते हैं

मेरे लिए बिल्कुल भी अनजान

यह मेरे लिए अनजान

मैं इनके लिए अनजान

इनसे उम्र के इस पड़ाव पर

मैं दोस्ती कर लूं या

इन्हें जान लूं तो कुछ हासिल

नहीं होगा

मैं इतनी भी मासूम और

नासमझ नहीं कि

जिंदगी की इस कड़वी सच्चाई से

हूं अनजान।


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