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सूरज न बन पाओ तो

सूरज हो या दीपक

दोनों का है मकसद एक

अंधकार को दूर कर

सबके जीवन में प्रकाश फैलाना

सूरज न बन पाओ तो

एक दीपक सा ही बनने का प्रयास करो और 

स्वयं प्रज्वलित होकर

सबके मन के अंधेरे कोनों में

रोशनी के अंबार भरो।