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शायद

शायद

मैंने समय रहते

ऐसा कर लिया होता तो

ऐसा नहीं होता

शायद मैं हर आने वाली बला को

टाल पाती

शायद मैं जो चाहती

वह हो पाता

शायद यह रास्ता मेरी मंजिल पर

आसानी से मुझको पहुंचा पाता

शायद कभी यह आसमान

जमीन तक उतर आता

शायद इन दोनों का मिलन

कभी हो पाता

शायद हम इतनी जल्दी न

बिछड़े होते

शायद यह फूल मुरझाने के लिए

न खिले होते

शायद रिश्ते मुझे इतना

रुआँसा और

जिंदगी मुझे इतना गमगीन न

करती

शायद मैंने दूसरों से पहले

अपनी फिक्र और अपनी कदर भी

कभी करी होती

शायद यह सूरज मुझसे थोड़ा

और दूर चला जाता

मुझे अपनी गर्मी से न

झुलसाता

शायद यह चांद मेरे और

करीब आता

मुझे शीतलता देता

सुंदरता का अहसास कराता

शायद मैं कभी आसमान में

उड़ जाती

शायद मैं कभी जमीन पर

तैर पाती

शायद मैं अपना मकान

जहां चाहती वहां बना पाती

शायद मैं इतना सबको

प्यार करने वाली

कहीं खुद के लिए भी

थोड़ा सा प्यार पाती

शायद मैं एक पग जमीन

और एक मुट्ठी आसमान को

अपनी झोली में भर पाती

शायद मैं इंद्रधनुष के रंगों

को चुराकर

अपनी चितवन सजा पाती

शायद मैं एक सूखे कुएं से भी

पानी भरकर ला पाती  

सदियों से प्यासी

अपनी रूह की प्यास

बुझा पाती

शायद मैं रेगिस्तान में भी

फूलों की वादियां उगा पाती

शायद मैं बादल बनकर

सूखी जमीन पर बरस पाती

शायद जिंदगी के किसी मोड़ पर

मैं तुमसे मिल पाती

अपने दिल की बात कह पाती

तुम उसे समझ पाते

मैं जैसी हूं वैसा ही मुझे

अपना पाते

तन की सुंदरता से

कहीं ऊपर है मन की

सुंदरता

आत्मा की सौंदर्यता

इस तथ्य को समझ पाते

इस सत्य को जीवन में

उतार पाते तो

जीवन सार्थक होता मेरा और

शायद तुम्हारा भी पर

शायद।