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प्यार न करेगा तो नरक मिलेगा

तू जो किसी को

प्यार न करेगा तो

तुझे मरने के बाद भी और

जीते जी भी नरक मिलेगा

खुद पर ध्यान केंद्रित करेगा और

दूसरे के दिल को छलनी और

आत्मा को दुखी करेगा तो

इस धरती से ही तेरे लिए

नरक की यात्रा का सफर

शुरू होगा

स्वर्ग और नरक के दर्शन

जब तक न हों

यह एक कल्पना का विषय हो

सकते हैं लेकिन

इस धरती पर स्वर्ग या

नरक की रचना करना

काफी हद तक हम पर ही

निर्भर करता है

स्वर्ग जैसी अनुभूति चाहिए तो

उसका आरंभ प्रेम से करो

नरक का द्वार खोलना है तो

प्यार को छोड़कर

सारे दुनिया भर के विकार

खुद में विकसित कर लो और

अपने शत्रु स्वयं बन जाओ

दूसरों का जीना भी दूभर

कर दो और

खुद भी मानव के रूप में

सारे अमानवीय कार्यों को

अंजाम दो

जो सब मिलकर इस

संसार की बगिया को

प्रेम के महकते फूलों से

सजायेंगे

तभी कहीं नरक के बदले

स्वर्ग की सुखद और अलौकिक अनुभूति को

प्रतिपल अपने जीवन में

प्राप्त कर पायेंगे।