इस जीवन को एक खेल की तरह खेलो


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तुम आगे हो
मैं थोड़ा पीछे तो फिर
क्या हुआ
यह क्या कम है कि
हम सब साथ-साथ हैं
इस जीवन को एक खेल की तरह ही खेलो
हाथ में समय बहुत थोड़ा है
सब मिलजुल कर रह लो
बिना एक दूसरे से लड़े झगड़े
खिलौना कोई महंगा न मिले
खेलने के लिए तो
गुब्बारों से काम चला लो
बैठने के लिए मखमली दूब न
मिले तो
सूरज के कारण धरती पर पड़ रही
अपनी परछाइयों से मन बहला लो आसमान की तरह विशाल बनो
पेड़ पौधों की तरह स्थिर
सामान्य व्यवहार करते हुए
हर पल महानता के एक नये शिखर को छुओ तुम।


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