चांदनी रात में
मखमली हरी दूब पर
आसमान से गिर रही
ओस की बूंदें
सफेद मोतियों की लड़ियों सी
प्रतीत होती हैं
बादल के टुकड़ों की प्रतिबिंब सी
चांद की छाया की एक स्वर्णिम लहर सी
अपना सब कुछ खोने से पहले
सब कुछ पा लेने को जैसे हों आतुर
अपना सर्वस्व त्यागने से पहले
लुटा रही हों जैसे अपनी श्वासों को
फूलों की वादियों में जान फूंकने के लिए
सबको अलविदा कहने से पहले
आखिरी दफा चूम रही हैं वह सब एक-एक करके फूलों के कोमल ललाटों को।
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