कुछ रंग प्यार के: ऋषिका द्वारा रचित कविता


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हमने दिल की किताब में आज भी,
तेरे सारे वादें सम्भाल कर रखें है…
कुछ रंग प्यार के आज भी हमने,
अपनी आँखों में बसा कर रखें है….

हर रंग में तुम्हारी यादें है,…,,
हर एहसास में तुम्हारी खुशबू है….
दूर होकर भी जो तुम्हारा एहसास कराती….
फसलों का पैबंद होकर भी ये, तार-तार नहीं होती….
ऐसे ही कुछ धुँधली हुई ,
फागुन के रंग जैसी…,,
तश्वीरें जहन में उतार रखी है..!

उतर कर भी न उतरे जो जीवन भर..,,
रंग किसी की चाहत का …..
लफ़्ज़ कम है प्यार बहुत है,
तेरे लिए इस पगली का…..
जुदाई का गम मुझे जिस क़दर नहीं आजमाता….
इस क़दर तेरी मोहब्बत का रंग मुझे है तड़पाता…..!!


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