जीवन और संघर्ष: स्मृति श्रीवास्तव द्वारा रचित कविता 


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जीवन संघर्ष है, सतत प्रयत्न करते रहो
सफलता मिलेगी निश्चित,
अग्नि जीविषा की प्रज्वलित करते रहो
देखो सुबह के सूरज को, जो बदल चीर के निकले,
अपनी इस अद्भुत शक्ति से वो अंधकार का विलय करे
संघर्ष की ज्वाला में तपकर तुम भी कंचन से बन जाओ
अंतर्शक्ति के बल पर अपने जीवन को स्वर्णिम बनाओ
जीवन संघर्ष है सतत प्रयत्न करते रहो
तूफान में भी जलता रहे, तुम ऐसा सक्षम दिया बनो
सही दिशा में बढ़ते जाओ, संग संकल्पों का रथ हो,
दृढ़ निश्चय कर लक्ष्य को पाओचाहे कितना कठिन पथ हो
तुम ऊर्जा के शक्ति पुंज हो अपनी शक्ति को पहचानो
ईर्ष्या द्वेष को उत्सर्जित कर, सबको हीअपना मानो।
जीवन संघर्ष है, सतत प्रयत्न करते रहो
आलस्य, निराशा त्यागो, अनथक प्रयत्न करते रहो
नन्हीं चींटी देखो कैसे बार बार है फिसलती
फिर भी नहीं हारती वो और अपनी मंज़िल पाती
कौन है जो कभी गिरा नहीं, हारा जो गिरकर उठा नहीं
मेहनत संघर्ष है व्यर्थ नहीं, इन बिन जीवन का अर्थ नहीं
जीवन संघर्ष है, सतत प्रयत्न करते रहो
रंग लाएगी मेहनत इक दिन बस निरंतर आगे बढ़ते रहो !!

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