शक्ति: पूनम भटनागर द्वारा रचित कविता


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शक्ति की कहानी है ये जग सारा,
जग में कोई नहीं शक्ति बिन बेचारा।
शक्ति में ही भक्ति है भक्ति में ही शक्ति,
फिर क्यों भटके मानव इधर -उधर मारा।
पक्षी में उड़ने की शक्ति है,
तो दौड़ने की शक्ति तुझ में भी है।
दृढ़ संकल्प शक्ति के साथ लगा दौड़,
उस राह पर जिस पर तेरी मंजिल का किनारा।
 देखने, बोलने की शक्ति का अनुमान लगाओ तुम।
 यदि लगा न पाओ तो, जाओ अंधे, गूंगे के पास तुम।
देखने,बोलने में शक्तिहीन बेचारों की कहानी से,
अपनी इन दिव्य शक्तियों का अनुमान लगा पाओ तुम।
शक्ति की अजब कहानी थी, झांसी की रानी।
सहनशक्ति की पावन मूरत थी,सीता जनक दुलारी।
मातृशक्ति से चमक रही, परिवारों की तस्वीर हमारी।
पितृशक्ति से आवाद हो रही, आसमान सी तकदीर हमारी।
शक्ति का कोई अंत नहीं, शक्ति का कोई मोल नहीं।
शक्ति वह महाशक्ति है, जो करती प्रकृति का संचालन।
जिसे अंबा कहूं, दुर्गा कहूं या कहूं महामाया।
शक्ति वह परम शक्ति है, जिसका किसी ने पार ना पाया।

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