सोंधी खुशबू लिए आई सुखद बयार,
नभ में छाई घनघोर घटाएँ आई वर्षा बहार।
चंचल चपला चमके बादल गरज रहे हैं,
रिमझिम बरसे बंदे नदिया उफन रही हैं।
मंद बयार बहती डालियाँ थिरक रही हैं,
बागबान सारे नवगीत गा रहे हैं।
जीव जंतु तर्र हो खुशियाँ मना रहे हैं,
गर्मी की ताफ लुप्त है कोयल कूक रही है।
हरित पर्ण के पत्तों से धरती लहरा रही है,
पंख पसार सारे वन मोर नाचते हैं।
टर्र टर्र कर मेंढक संगीत गा रहे हैं,
रंग बिरंगे पुष्प बागों में खिल रहे हैं।
हंस कतारबद्ध चल मन सबका मोहते हैं,
हलदर का खेत लहरे वे खुशियाँ मना रहे हैं।
प्यारी वर्षा बहार का आना भू पर,
सकल जगत की शोभा निर्भर है वर्षा पर।

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