रौशन जिंदगी: अनिल कुमार श्रीवास्तव द्वारा रचित कविता


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कर्मफल की दिव्य-ज्योति से नहाए जिंदगी
सत्कर्मों से सुसज्जित पुण्य-प्रण हो बंदगी,
ज्योति-पूंज बन अग्रसर हों लक्ष्य पर अपने सदैव
मानसा, बचसा, कर्मणा से जगमग रौशन जिंदगी।
सभ्यता का अभिमान बनकर नव-सृजन का मंत्र लें
हो अलौकिक गाथा अपनी विश्व यह जय जय करे,
हर कदम मिशाल बन कर मंजिलों का दर्प हो
साधना और कल्याण परहित से हो रौशन जिंदगी।
ज्ञान समाहित कल्याण का वरदान लेकर हम बढ़े
प्रेम, करूणा और दया धारण सदैव दिल में करें,
हम जनक हैं इस धरा पर गीत, गुंजन और कल्याण के
हम उठें जब भी करें परमार्थ हित संधान रौशन जिंदगी।
दु:ख मिटे दारिद्रय हर लें खुशियां आपार भर दें
हों सदा खुशहाल जन-जन प्रेरणा का स्रोत जन-गण,
आत्म-शांति, आत्म-चिंतन उज्जवल भारत भारती
उजास फैले हर तरफ़ दिनमान रौशन जिंदगी ।
हो उजाला हर तरफ तम सदा विचलित हो मन से
सादगी, विश्वास और समानता सदा दिल में बसे,
परिणय करे पुरूषार्थ का हर पंथ का सम्मान हो
कर दमन अहंकार का हो दीदार रौशन जिंदगी ।

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