पहली बारिश: मनीषा अमोल द्वारा रचित कविता


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पहली बारिश की पहली फुहार
झंकृत कर गयी दिल के तार
ख़ुशनुमा एक माहौल बना
तपती प्यास बुझी इस बार

बारिश की बूँदों की छमछम
झूम उठा मेरा घर आँगन
बहती धारा पानी की कलकल
तरंगिनी जैसे गाती सरगम

था महीनों से जिसका इंतज़ार
आज प्रकृति ने किया उपकार
मुसकाती हरियाली चारों ओर
मानवता को अनमोल उपहार

खिल रही मुस्कान फूलों की
गूंज रही गुंजार भवरों की
तितलियाँ उड़ने को मचल रहीं
कूक रही चहचहाट पंछियों की

रोमांच का आँचल है फैला
प्रगाढ़ प्रेम का मधु रस घोला
आओ नाचे सब मिलजुल
मस्त हों हम हरफ़नमौला


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