हमारे छोटे से संसार में कुछ रंग प्यार के,
छोटी-मोटी तकरार और बहुत सारे इक़रार के।
तेरी बातों में लिपटे हर लफ़्ज़ पर चढ़े उस खुमार के,
वो रंग मेरे साज श्रृंगार से उभरे तुम्हारे इंतज़ार में।
मेरी बगिया के फूलों को भी दिखता यह प्यार है,
कि खिलते-झूमते हैं ये मंद हवा के झोंकों से।
साल में आती एक बार बसंत की बहार है,
तुम्हारे प्यार की बौछार से मेरी दुनिया गुलज़ार है!
तुम्हारी नाराज़गी में भी प्यार छुपा होता है।
तुम्हारी बेपरवाही में भी परवाह की शिकन है रहती,
कुछ नहीं कहोगे तुम फ़िर भी तुम्हें मेरी फ़िक्र है रहती!
अपनी ज़रूरतों को अगर मैं नज़रंदाज करूँ,
फ़िर मुझे समझाते कि मैं अपना भी ख़्याल रखूँ।
इत्मीनान से मेरी बातों और परेशानियों को तुम सुनते,
सुझाव और तर्क देकर तुम हर दुविधा मेरी दूर करते।
सम्मान और समर्पण से तुमने मेरा घर-बार रंग दिया,
प्यार के रंगों में सभी रंग तुमने मुझपर न्योछावर किया!

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