तुमसे मिलकर ,बिछड़ने का हौसला भी रखते हैं,
तेरे हंसने और रोने के सलीके का सिला भी रखते है,
सताने का एक बहाना रहा,तेरी दिलकश दिल्लगी,
सिलसिला मिलन का ,बिछड़ने तक सब्र रखते हैं।
नाशुक्रा हो जाना , वादों और इरादों से इतराना,
अपनी मशरूफियों से कभी इधर भी मुख फेरना,
खुद को भूला बैठूं,सारे जज्बातों को मिटाने मे,
दिल पर एक एहसान ,साथ देने का गुमा करना
कितना हद तक सब्रे-इंतहा आजमाने लगे
कोई अपना_सा अक्स देख , निखर जाने लगे
कितने बहाने ,मौसम के रंग ,रंगी आदतें-अंदाज
वक्त के हर पल से किस्से कहने को कशिश जागे।
दूर रह भी जो अपनेपन का ,साथिया होता है
पास आकर भी,ना अपना, हमसाया होता है
जितना तुम्हें पास आने की इजाजत दिया है
दूर जाने को भी ,पूरा जहां ही सौंप दिया है।
सब्र की इंतहा से आगे निकलकर देखा,
दूर तलक बस गिला को हवा होते देखा,
सारे ख्याल एक कोने में अजनबी होते,
एक यकीने-खुदा को ,हवा में तिरता देखा।

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