एक छोटी सी आशा: अभिजीत सिन्हा द्वारा रचित कविता


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ये कुछ बरसों की ज़िन्दगी में,
अपने ख्वाइशों का आसमान छोटा सा,
दिल में लिए उम्मीदों की अभिलाषा,
है बस मेरी एक,
छोटी सी आशा।

तजुर्बे और आज़माइश की दौड़ में,
सीख रहा हूँ रोज ही जीवन की परिभाषा,
अजब अजब हैं लोग ये सारे,
अजब है इनकी भाषा,
पनप रही है दिल में मेरे भी,
एक छोटी सी आशा।

अजब गजब के खेल हैं सारे,
क्या खूब है ये जीवन का तमाशा,
तकलीफें तो लगी रहेंगी,
क्यों ना मैं हंस लूँ जरा सा,
खुल के जीने की है अब मेरी,
एक छोटी सी आशा।

जीवन पथ है सदा कठिन,
हौसले से है बढ़ते जाना,
लहरों से सीखा है लड़ना,
गिर के हमेशा उठ जाना,
नहीं है मेरे दिल में कोई निराशा,
अनंत प्रयास करने की है दिल में,
एक छोटी सी आशा।


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