उड़ता गुलाल: अर्चना गुप्ता द्वारा रचित कविता


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उड़ता गुलाल लगे जैसे,
प्रकृति का रंगों से हो गया श्रृंगार,
कह रहा उड़ता  गुलाल,
छा गया होली का खुमार,
आ गया पावन त्यौहार,
दिलों को दिलों से मिलाने का त्यौहार।
उड़ते गुलाल से आए,
भीनी भीनी खुशबू गुलाब की,
सुगंध में होता ऐसा शवाब,
आने लगें  दिन में ख्वाब,
रंगों की महफिल में,
खिल जाएं गुलाब ही गुलाब,
सबके चेहरे पर हो गुलाल ही गुलाल।
धरती -अंबर सब में ,
नजर आए उड़ता गुलाल,
सब रंग मिलकर दे रहे संदेश एकता का
स्नेह, प्रेम और सौहाद्रता  का,
प्रकृति से प्रेम का,
जीवन में रंगों से स्नेह का।
रंगों से ही जीवन का उद्गम,
रंगों से ही बसता जीवन,
रंगों से ही पलता जीवन,
रंगों से  ही सजता जीवन
उड़ते गुलाल को देखें जब निगाहें
लगे जैसे प्रभु प्रेम की हो रहीं बौछारें।।

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