इस बार वह सच में इजाजत मांग रहा था : डॉ. मीनल द्वारा रचित कविता


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इस बार
वह सच में मुझसे इजाजत मांग रहा था
वह मेरा साथ ही नहीं बल्कि
अपना साथ भी छोड़ रहा था
वह इस दुनिया को अलविदा कह रहा था
वह अपनी अंतिम श्वासे ले रहा था
वह अपना जिस्म बेजान छोड़ अपनी रूह को
अपने संग लिये कहीं जा रहा था
वह अब जीती जागती अवस्था में नजर नहीं आ रहा था
वह मौत को गले लगा चुका था
उसका यह मृत तन भी बस कुछ देर था सबके साथ
उसके बाद वह भी कभी नहीं दिखेगा
इस दफा वह सही था
मैं गलत
वह जीवित रहेगा
मौत को पराजित करेगा
पहले जैसा था वैसा सेहतमंद हो जायेगा
ऐसा कुछ नहीं हुआ
इस बार वह सच में इजाजत मांग रहा था
जिसे मैं बिल्कुल भी समझ नहीं पाई थी।

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