in

हाथों का जादू

भैया, मैं बड़े होकर बिल्कुल आप जैसी बनना चाहती हूं। मुझे आपकी हर बात पसंद है। आप जिस तरह से लिखते हो, जिस तरह से चित्रकारी करते हो, जिस तरह से तस्वीरों में रंग भरते हो, जिस तरह से अपनी अंगुलियों से कलम को पकड़ते हो, जिस तरह से कोरे कागज के संगमरमरी सफेद चांदनी से चमकते बदन पर काली स्याही के मोतियों के जादुई अक्षर बिखेरते हो, यह सब मुझे भी सिखा दो ना। मुझे ठीक अपना जैसा बना दो ना। आप के हाथों में जो है जादू, वह मुझे भी थोड़ा सा उपहार स्वरूप दे दो ना।