अभागिन


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मेरी शादी होगी। मैं एक दुल्हन बनूंगी। लाल सुनहरे एक शादी के जोड़े में सजकर खूब श्रृंगार करूंगी। खूब हंसूगी। दुनिया में ऐसी कौन सी लड़की होगी जो शादी के बाद जिंदगी की एक नई शुरुआत के ऐसे हसीन ख्वाब न देखती होगी लेकिन अपने घर से विदा होते ही और ससुराल में कदम रखते ही मैंने जो महसूस किया उससे मेरे दिल पर एक भारी वज्रपात हुआ। ससुराल में पहला कदम और सब कुछ एक दर्पण सा साफ। आगाज अच्छा न हो तो अंजाम क्या होगा, इसका अंदाजा तो हर कोई लगा सकता है। मेरे चेहरे की सारी खुशियां जैसे कहीं गुम गई और मैं एक गहरी सोच में पड़ गई कि मेरी आगे की जिंदगी अब किसके सहारे कटेगी। मुझे कहां, किससे और न जाने कैसे कैसे समझौते करने पड़ेंगे। हर दुल्हन मेरी तरह सच में एक सुहागन सा जीवन नहीं जी पाती, कुछ कुछ होती हैं पहले दिन पहले पल से ही मुझ सी अभागिन भी।


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